
काशी का आध्यात्मिक हृदय — मंदिर, घाट, आश्रम और पूजा सेवाएँ।
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भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक, गंगा के पश्चिमी तट पर।

उमरहा में विहंगम योग परंपरा का विशाल सात-मंज़िला ध्यान मंदिर।

ललिता घाट पर नेपाली शैली का शिव मंदिर, काष्ठ और टेराकोटा में सूक्ष्म नक्काशी से सज्जित।

अस्सी और गंगा के संगम पर सबसे दक्षिणी घाट, प्रातःकालीन ‘सुबह-ए-बनारस’ आरती के लिए प्रसिद्ध।

बनारस राजपरिवार का 19वीं सदी का घाट, तटवर्ती शिव मंदिर और पुराने किले के साथ।

जहाँ गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस का अंश रचा; नाग नथैया लीला का स्थल।

पवित्र महाश्मशान घाट, जहाँ काशी मोक्ष का वचन देती है — जहाँ चिताएँ कभी नहीं बुझतीं।

काशी का सबसे भव्य घाट, जहाँ हर संध्या भव्य गंगा आरती होती है।
नेपाली (कठवाला) मंदिर और ललिता गौरी मंदिर का स्थल।

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श्री अरविंद और श्री माँ की शिक्षाओं पर आधारित ध्यान और अध्ययन का केंद्र।