काशी का सबसे भव्य घाट, जहाँ हर संध्या भव्य गंगा आरती होती है।
दशाश्वमेध वाराणसी का मुख्य और सबसे जीवंत घाट है, जो काशी विश्वनाथ मंदिर के निकट है। इसका नाम भगवान ब्रह्मा द्वारा यहाँ किए गए दश-अश्वमेध यज्ञ की स्मृति में पड़ा। हर संध्या पुजारी अग्नि, शंख और मंत्रोच्चार के साथ भव्य गंगा आरती करते हैं, जिसे नौकाओं और सीढ़ियों पर एकत्र श्रद्धालु निहारते हैं।
गंगा आरती
प्रतिदिन संध्या
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जहाँ गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस का अंश रचा; नाग नथैया लीला का स्थल।