काशी में पिंडदान व श्राद्ध
काशी में पिंडदान और श्राद्ध पूर्वजों (पितरों) के सम्मान और उनकी मुक्ति हेतु किए जाने वाले पवित्र कर्म हैं। काशी — और विशेषकर पिशाच मोचन — इन कर्मों के लिए संसार का सर्वोच्च स्थान माना जाता है।
जो काशी में देह त्यागते हैं उन्हें मोक्ष मिलता है; इसी कारण यहाँ किया गया तर्पण व श्राद्ध पितरों तक सीधे पहुँचता है। पिशाच मोचन कुंड त्रिपिंडी श्राद्ध से विशेष रूप से जुड़ा है, जो पितरों को प्रेत-योनि से मुक्त करता है।
पिंडदान व श्राद्ध क्यों? — अर्थ →पितृ पक्ष (महालय)
प्रत्येक वर्ष लगभग सितंबर अंत से अक्टूबर मध्य (आश्विन कृष्ण पक्ष)
ये सोलह दिन सर्वाधिक शुभ हैं, परंतु काशी में श्राद्ध वर्ष भर किया जा सकता है। इस वर्ष की सही तिथियाँ पंचांग में देखें।
विधि
- 1
संकल्प
पंडित जी को संकल्प बताएँ — पितर का नाम, गोत्र और आपका संबंध।
- 2
तर्पण
गंगा तट पर पितरों को तिल व जौ सहित जल अर्पित करें।
- 3
पिंडदान
निर्धारित मंत्रों सहित पितरों के लिए पिंड अर्पित करें।
- 4
पिशाच मोचन पर त्रिपिंडी
विशेष त्रिपिंडी श्राद्ध पितरों को अशांत योनि से मुक्त करता है।
- 5
दान और भोज
ब्राह्मण या जरूरतमंदों को भोजन व दान के साथ समापन करें।
काशी में कहाँ
- 📍 पिशाच मोचन कुंड
त्रिपिंडी श्राद्ध का सर्वोच्च स्थल।
- 📍 मणिकर्णिका घाट
महान श्मशान घाट; गंगा तट पर पिंडदान।
- 📍 गंगा घाट
किसी भी मुख्य घाट जैसे दशाश्वमेध या अस्सी पर तर्पण।
क्या साथ लाएँ
- पितर का विवरण: पूरा नाम, गोत्र और आपका संबंध।
- कुछ विशेष नहीं — पंडित जी पूजा सामग्री (तिल, जौ, कुश, पिंड) की व्यवस्था करते हैं।
- सरल, स्वच्छ वस्त्र; पुरुष प्रायः बिना सिला धोती पहनते हैं।
- वैध पहचान-पत्र और दक्षिणा हेतु नकद।
उचित मूल्य
₹2,100 – ₹11,000
काशी में त्रिपिंडी या पिंडदान का सांकेतिक दायरा — विधि व संकल्प अनुसार बदलता है। आरंभ से पूर्व पंडित जी से दक्षिणा तय करें; यह दायरा अधिक वसूली से बचाता है।
जानकारी सांकेतिक एवं मार्गदर्शन हेतु है। विधि, तिथि व दक्षिणा अपने पंडित जी से पुष्टि करें।