जहाँ गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस का अंश रचा; नाग नथैया लीला का स्थल।
तुलसी घाट का नाम संत-कवि गोस्वामी तुलसीदास के नाम पर है, जो यहाँ रहे और जिन्होंने रामचरितमानस का अंश यहीं रचा। प्रतिवर्ष यह घाट सदियों पुरानी नाग नथैया लीला का आयोजन करता है, जिसमें कृष्ण द्वारा कालिय नाग के दमन का मंचन होता है।
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पवित्र महाश्मशान घाट, जहाँ काशी मोक्ष का वचन देती है — जहाँ चिताएँ कभी नहीं बुझतीं।