काशी के घाट गंगा के पश्चिमी तट पर दक्षिण में अस्सी से उत्तर में राजघाट तक फैले हैं — पत्थर की सीढ़ियों, मंदिरों और अनुष्ठानों का अटूट तट। यहाँ उन्हें नदी-क्रम में देखें।
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भोर की सुबह-ए-बनारस आरती, दक्षिणी प्रवेश घाट
अस्सी और गंगा के संगम पर सबसे दक्षिणी घाट, प्रातःकालीन ‘सुबह-ए-बनारस’ आरती के लिए प्रसिद्ध।

तुलसीदास का घाट — जहाँ रामचरितमानस रचा गया
जहाँ गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरितमानस का अंश रचा; नाग नथैया लीला का स्थल।

१९वीं सदी के तटीय राजमहल
बनारस राजपरिवार का 19वीं सदी का घाट, तटवर्ती शिव मंदिर और पुराने किले के साथ।

भव्य संध्या गंगा आरती
काशी का सबसे भव्य घाट, जहाँ हर संध्या भव्य गंगा आरती होती है।
नेपाली मंदिर व ललिता गौरी
नेपाली (कठवाला) मंदिर और ललिता गौरी मंदिर का स्थल।

मोक्ष — महाश्मशान घाट
पवित्र महाश्मशान घाट, जहाँ काशी मोक्ष का वचन देती है — जहाँ चिताएँ कभी नहीं बुझतीं।
जैसे-जैसे हम काशी का तट मानचित्रित करते हैं, और घाट जोड़े जा रहे हैं।